Hindi Kahaniyanझबरीले कुत्ते की समझदारी

Hindi Kahaniyan: नवाबगंज के महाराज के पास एक विशेष रथ था, जो केवल उन्हींके लिए ही बनाया गया था। इस रथ को चमड़े की पट्टियों और घंटियों से बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया गया था। एक दिन जब महाराज अपने रथ में सैर करके वापस आए, तो वे उसे चला कर महल तक ले गए।

महाराज के रथ को उसके लिए बने स्थान में नहीं रखा गया। उस रात बहुत तेज बारिश हुई। रथ का चमड़ा भीग कर फूल गया। उसमें से चमड़े की बदबू आने लगी।

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महाराज ने महल में अच्छी नस्लों के कई कुत्ते भी रखे हुए थे। जब इन कुत्तों को चमड़े की गंध आई तो वे उसे सूंघते-सूंघते रथ तक आ गए और उन्होंने उस रथ पर हमला कर दिया।

सुबह महाराज अपने सुंदर रथ की हालत देख कर आपे से बाहर हो गए। रथ के चीथड़े कर दिए गए थे। उन्हें बहुत गुस्सा आया। दरअसल हुआ यूं कि रात को कुत्तों के रखवालों ने आलस किया और कुत्ते खुले छूट गए। इतना ही नहीं, सहायकों ने राजा से झूठ भी बोला कि यह काम महल के कुत्तों का नहीं है। कोई आवारा कुत्ते महल में आ गए होंगे, रथ की उन्होंने ही यह हालत की है।

राजा ने उन सबकी बातें सुनकर आदेश दे दिया कि उनके राज्य के आवारा तथा पालतू कुत्तों को जान से मरवा दिया जाए।

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झबरीले कुत्ते की समझदारी

राज्य के सारे कुत्ते डर गए। सबने मिलकर एक सभा की। उनके राजा का नाम झबरीला था। तीखे कानों व रूपहले बालों वाला झबरीला एक सुंदर कुत्ता था। वह बहुत निडर, समझदार और चौकस भी।

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उसने कहा, “मैं महाराज से बात करूंगा और कोशिश करूंगा कि उन्हें सच बताया जा सके। निर्दोषों को तो सजा नहीं मिलनी चाहिए। तुम लोग यहीं रहो और शांति बनाए रखो।” सारे कुत्तों को चिंता थी कि कहीं झबरीला को रास्ते में ही ना मार दिया जाए।

झबरीला बहुत ही शान के साथ महल की ओर चल दिया। किसी में भी उसे छूने का साहस नहीं किया। वह महल में दरबानों के पास से निकलते हुए सीधा राजा के सिंहासन के पास जा कर बैठ गया।

महाराज उसे देख कर बहुत हैरान और प्रभावित हुए। झबरीला ने महाराज को प्रणाम करने के बाद पूछा कि उन्होंने सारे कुत्तों को मरवाने का आदेश क्यों दिया है? महाराज ने बताया, “कुत्तों ने मेरे मनपसंद रथ का सत्यानाश कर दिया है इसलिए।”

झबरीला ने अपना पक्ष रखा- “…लेकिन असली अपराधी का पता लगाए बिना ही आपने सारे कुत्तों को दोषी ठहरा दिया। आपको पहले सच का पता लगाना चाहिए था कि असल में रथ को नुकसान किसने पहुंचाया है? हो सकता है कि यह काम महल के कुत्तों का ही हो और आपसे सच छुपाया जा रहा हो।”

महाराज को लगा कि बात तो सही है। राजा को किसी भी तरह से अन्याय नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया, “लेकिन मैं कैसे पता लगा सकता हूं कि रथ को महल के कुत्तों ने नुकसान पहुंचाया है या नहीं?”

झबरीला ने सलाह दी, “महाराज! महल के सारे कुत्तों को दरबार में ला कर छाछ और घास खाने को दी जाए।”

जब महल के कुत्तों को दरबार में ला कर घास व छाछ खाने को दिया, तो कुछ ही देर में उन्हें उल्टियां आने लगीं। इस तरह चमड़े के टुकड़े बाहर आ गए। अब महाराज को पता लग गया कि असली अपराधी कौन था।

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झबरीले कुत्ते की समझदारी

झबरीला ने तब भरी सभा में कहा, “सभी जीवों के प्राणों की रक्षा की जानी चाहिए, सबके साथ समान भाव से न्याय होना चाहिए।” झबरीला की बातें सुनकर राजा बेहद प्रसन्न हुए। उन्हें झबरीला से कोई भी तोहफा मांगने को कहा।

झबरीला ने कहा- महाराज! मैं किसी ना किसी तरह भोजन जुटाकर अपनी जान बचाए रखता हूं, लेकिन मेरी गुजारिश है कि आप अपने महल के इन कुत्तों को माफ कर दें, क्योंकि इन्होंने भी अपना पेट भरने के लिए ही ऐसा काम किया है।

झबरीला की बात सुनकर महाराज बेहद प्रसन्न हुए। उन्होंने उसी समय सभी दोषी कुत्तों को माफ कर दिया और 2 थाल भोजन के साथ झबरीला को सम्मान के साथ विदा किया।

निष्कर्ष (Conclusion)

इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि मुसीबत के समय किसी अनुभवी के सलाह जरूर लें। हमें ऐसे मौके पर हड़बड़ाहट दिखाने के बजाय समझदारी से काम लेना चाहिए।

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